मोदीजी केप्रसिद्धी पराङ्मुखं आध्यात्मिक गुरु।भाग2

छोटी मूर्ति,महान किर्ती
:मोदीजी केप्रसिद्धी पराङ्मुखं आध्यात्मिक गुरु।भाग2
शिवांजय": डॉ। संजय होनकालसे
drsanjayhonkalse@gmail.com
(प्रथम भाग रेफ
  उन्होंने संन्यासजीवन जीने का पक्का इरादा हिने जे बाद, वे सीधे विवेकानंद के  गुरु स्थान कोलकाता,बेलूर के मठ में चले गए। वहा श्री आत्मस्थानंदजी  प्रमुख संचालक थे।उनके सान्निध्य मे नरेंद्रजीने  कुछ समय बिताया और उनसे संन्यास दीक्षा देने का अनुरोध किया। लेकिन ......
आत्मस्थानंदस्वामी ने इससे परहेज किया और कहा कि नरेंद्र का जन्म समाज के कल्याण के लिए हुआ था और उन्हें देश की सेवा करने का संकल्प लेना चाहिए। इस अर्थ में, आत्मस्थानंद भी उनके गुरु थे, जैसे दत्तात्रेय ने कई गुरु किए।
वास्तव में, नरेन्द्र को आत्मस्थानंद के मना करने पर वह नाराज नहीं हुए। वे राजकोट पहुँचे और रामकृष्ण मठ जाके वहाँ भी संन्यास लेने की कोशिश की,लेकिन वह भी असफल रहे।
दैव विधान कुछ और हि था न।

फिर मोदी RSS में सक्रिय हो गए, वाजपेयी के तहत सीखे,लेकिन रामनिती  छोड़ दिया और कृष्णानीती का इस्तेमाल कर गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए। 
इस बीच, जब उन्हें कुछ समस्याएँ हुईं, तो वे लगभग 18 या 19 साल पहले ऋषिकेश में स्वामी दयानंद गिरिजी के संपर्क में आए और मोदी ने उनका मार्गदर्शन भी प्राप्त किय एवं  2017 के सितंबर मे  उनके निर्वाण तक संबंध बनाये रखा।

और  खुशी का दोहरा संयोग देखें,स्वामी दयानंद गिरिजी काभी मेरी आध्यात्मिक ग ति विधियों पर समान प्रभाव है,वास्तव में अभिरामदासजी के संपर्क से 11 साल पहले से।जब स्वामी दयानंदजीका वाशी में सत्संग प्रवचन सप्ताह था,तब उन्होंने वाशी में गीता और वेद का पाठके वर्ग शुरू किये थे। मैंने उनके शिष्य श्री उदय आचार्यजी को रहने के लिए जगह प्रदान की थी,जो यह वर्ग चलाने जा रहे थे। उस समय उदयजी मेरे घर  आ 
जा रहते थे और मेरी माताजी के साथ(उस समय 66)उनकी अच्छी बनती थी,माताजिकी बनी रासोई  और स्वभाव उन्हे बहुत भाता था । उनके  वजहसे  पिछले 28 से 30 वर्षों से  ऋषिकेश आश्रम जाना लगा राहता है।
दयानंदस्वामी, तपोवन स्वामी के शिष्य, चिन्मयानंद स्वामी के गुरु भाई हैं। मैंने स्वामी दयानंदजी इतनी आसान, मधुर, वाक्पटुता एवं कथन शैलीकभी नहीं देखी। उनका विश्लेषण बहुत ही सुंदर,मधुर,प्रासंगि क और गहरा होता था,दिलमे घर करता था। मैंने उनके कारण ही आध्यात्मिकता के सही अर्थ, मार्ग और अंतिम लक्ष्य को समझा और मैंने उसका पूरा उपयोग किया। मेरे और छात्रों के लिए विकास, यात्रा की व्यवस्था, आध्यात्मिक विकास, वह पर्याप्त था, इतना ही नहीं, उन सभी अनुभवों के आधार पर,
मेरे छात्रोंके ,1997 और 2000 के बीच, मेरी यात्रा के दौरान मेरे सवालों के आधार प
 आध्यात्मिक उद्धरण द्वारा  अध्यात्मान्क ( spiritual quotient)प्रबंधित किया:Management By Spiritual Quotient: पावर ऑफ फेथ जो संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रसिद्ध हुआ। (https: //www.amazo n.com/Management-Spiritual-Quotient-Power-Faith/dp/1448970148)
स्वामी के आश्रम ऋषिकेश, कोयम्बटूर और पेन्सिलवेनिया में हैं। उन्होंने यह सब अयाचित  रवैये के साथ किया। उन्होंने सेवा आंदोलन के लिए कई गतिविधियां चलाईं, कई स्कूल चलाए, AIM (ऑल इंडिया मूव मेंट) for seva चलाई।उन्होंने बहुतों की आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया और कई साधुओं और छात्रों की परंपरा और विरासत को पीछे छोड़ रखा है। मोदीजी लगातार उनके संपर्क में थे।
प्रधानमंत्री बनने के बाद, उडुपी मठ के प्रमुख, विश्वेश तीर्थ स्वामी, मोदी के संपर्क में आए, जो उमा भारती के गुरु (1995 में शुरू किए गए थे)। मोदीजी 2014 मी जब प्रधानमंत्री बने तो उनकी विश्वेस तीर्थ स्वमुसे संबंध जुड गयेथे .फिर 2019 मी स्वामीजी ने शपथ विधी समारोह मी अपनी उपस्थिती दर्ज करायची थी .।मोदीजीने उनके सांनीधमे गुरुपौर्णिमा उत्सव मनाया  था ।
बीमारी के कारण दिसंबर के आखिरी रविवार को उनका निधन हो गया।
इस प्रकार आत्मस्थानंदस्वामी, विश्व तीर्थ, दयानंदगिरिजी, महाराज अभिरामदास जी उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे। उसी तरह, कुछ तोतनयन स्वामी ने दावा किया कि वह उनके गुरु थे और कुछ (पुलकितस्वामी, साहिबाबाद, दिल्ली) गायब हो गए 
देश के होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारिवारिक गुरु श्रीरामानंद संत सेवा आश्रम के महंत स्वामी अभिराम दास ने मोदी की जीत को त्याग और तपस्या की जीत बताया।

मायाकुंड स्थित श्रीरामानंद संत सेवा आश्रम के महंत स्वामी अभिराम दास महाराज नरेंद्र मोदी के परिवार के गुरु हैं। पहली मर्तबा जब नरेंद्र मोदी छात्र जीवन में बिना घर में बताए बदरी केदार की यात्रा पर आए तो वह गुरु के गरुड़चट्टी हनुमान गुफा आश्रम में कई दिन ठहरे और गुरु के दर्शन के बाद ही यात्रा पर गए थे। नरेंद्र मोदी की मां हीराबा मोदी की भी गुरु के प्रति अगाध श्रद्धा है। अपने पूजा गृह व बैठक में मां हीराबा ने गुरु अभिराम दास महाराज की काफी पहले से फोटो लगा रखी है।

चुनाव से पूर्व नरेंद्र मोदी के छोटे भाई पंकज मोदी स्वयं यहां आए थे और अपने गुरु के साथ एकांत में काफी देर चर्चा की थी। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की बड़ी जीत पर उनके गुरु स्वामी अभिराम दास महाराज ने कहा कि नरेंद्र की जीत त्याग और तपस्या की जीत है।

वास्तव में नरेंद्र एक ऐसा व्यक्ति है जो पूर्ण रूप से समर्पित है। अटल जी को उन्होंने अपने में समाहित कर देश के लिए स्वयं को समर्पित किया। अपने शिष्य की सफलता पर गुरु अभिराम दास ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के स्वाभिमान को विश्व समझेगा। देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी। गो हत्या व अन्य अधार्मिक कृत्यों पर अंकुश लगेगा। नरेंद्र मोदी के आने से उत्तराखंड का भी विकास होगा।
मोदी ने उत्तराखंड में एक रेलवे नेटवर्क स्थापित किया है और काम पूरे जोरों पर है। उत्तराखंड चारधाम पक्का मोटार मार्ग जो सारे seasons मी चलत रहेगा ऐसा All season road का काम शुरू है जिस्के हो जाणे पर सिधे केदार तक मोटार रास्ता होगा।
 काशी में 2019 के चुनावों के दौरान, मोदी पूरी रात केदारनाथ के पास रुद्र गुफा में ध्यान कर रहे थे।
इस तरह, निस्पृह, निस्वार्थ, देशभक्त, गैर-भ्रष्ट, सच्चे हिंदू पंत प्रधान सेवक, जिन्होंने अपने गुरु के शब्दों और विश्वासों को पूरा किया है, कई शताब्दियों के बाद भारत को प्राप्त हुए हैं। अपनी माँता गुरु और गुरुओं के प्रति अपनी श्रद्धा और काम के लिए लाखों साष्टांग प्रणाम और प्रणोदन!
"शिवंजय": डॉ। संजय होनकळसे
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 । Shivarpanam।

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