महाभारत कालिन शापामुळे ग्रासित स्मशान भूमी:अफगाणिस्थान: महाभारत कटाच मूळ व अफगाणिस्थान अस्थिरतेच मूळ महाभारतात*.:*भाग 1

भाग 1

*महाभारत कालिन शापामुळे ग्रासित स्मशान भूमी:अफगाणिस्थान: महाभारत कटाच मूळ  व अफगाणिस्थान अस्थिरतेच मूळ महाभारतात*.:*
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                    ।शिवसंकल्पमस्तु।
हिंदुधर्म व भारत याच्या सर्व चालीरीती ,संस्कृती ,सण, वार ,महिने ,धर्म ,व्यवहार हे पूर्ण पणे शास्त्रोक्त आहे असे मला  शिवंजय संजयला लहान पणापासून वाटत आले आहे व जसजसा मोठा होत गेलो ,तसतशी यात्रा ,वाचन ,अनुभव या द्वारे  सातत्याने प्रचिती होत गेली.आपले दुर्दैव आहे की याची official नोंद व वा शिक्षण यापासून आजही आपण वंचित आहोत व जाणीव पूर्वक ठेवले जात(गेलो) आहोत ,एका जाणीव पुर्वक षडयंत्राचे बळी आहोत आपण.
आपली संस्कृती शास्त्र सांगते की कुणाचे शाप ,तळतळाट वा हाय घेऊ नयेत कारण करावे तसे भरावे ,वा पेरिलेची उगवते हा न्याय लागू होऊन त्याचे फलित असपणास भोगावे लागतात असे आपले धर्म शास्त्र सांगते .यास आपल्या आध्यत्मिक भाषेत *सूक्ष्म कर्म सिद्धांत* असे म्हणतात .हे  तत्वज्ञान आता सर्व जग हळू हळू मान्य करू लागले आहे व यास फुलपाखरू परिणाम व BUTTETR FLY EFFECT या गोंडस नावाने 1971 पासून ओळखले जाते .भारताची फाळणी ,नेहरू गांधी घराण्याचा अस्त व अंत या मागे हा BUTTERFLY EFFECT अर्थात सूक्ष्म कर्म सिद्धांतच आहे.असाच एक शाप ,तळतळाट  यामुळे अफगाणिस्थान गेले 5000 वर्ष अस्थिरतेच दुःख भोगत आहे व साम्राज्यांची स्मशानभूमी झाली आहे.*Afganistan is a graveyard of Empires, अफगाणिस्थान हि साम्राज्याची दफन भूमी आहे*.
अफगाणिस्थानच्या अस्थिरतेच मूळ माहाभारतात आहे व महाभारतातील संहाराच मूळ अफगाण मध्ये आहे.पाहूया कसे ते.
.अफगाणिस्तानशी भारताचे संबंध एक दशक किंवा शंभर वर्षे जुने नसून हजारो वर्षे जुने आहेत. होय, अफगाणिस्तानचे भारताशी ५००० वर्ष जुने संबंध आहेत. शिवाय इतिहासातील सर्वात मोठे युद्ध मानले जाणारे महाभारताचे षडयंत्रच मूळ अफगाणिस्थान मध्ये आहे व अफगाणिस्थानच्या अस्थिरतेच्या शापच मूळ महाभारतात आहे.
अफगाणिस्तान महाभारत काळाशी संबंधित आहे तर जाणून घेऊया अशीच रंजक माहिती ...
​अफगाणिस्तानशी भारताचे ५००० वर्षे जुने संबंध

आज तालिबान राजवटीने अफगाणिस्तान संपूर्णपणे ताब्यात घेतले आहे. सर्व सरकारी संस्था आता तालिबानी दहशतवाद्यांनी आपल्या हातात घेतल्या आहेत, लोकशाही व्यवस्था पूर्णपणे नष्ट झाली आहे. सध्या मुस्लिम लोकसंख्या असलेला हा देश एकेकाळी हिंदू संस्कृती आणि चालीरीतींवर विश्वास ठेवणारा होता. त्यासाठी इतिहासाची पाने चाळून
अफगाणिस्तान-भारताच्या संबंधाबद्दल जाणून घेऊया. अफगाणिस्तानशी भारताचे संबंध एक दशक किंवा शंभर वर्षे जुने नसून हजारो वर्षे जुने आहेत. होय, अफगाणिस्तानचे भारताशी ५००० वर्ष जुने संबंध आहेत. शिवाय इतिहासातील सर्वात मोठे युद्ध मानले जाणारे महाभारताचे षडयंत्रही येथूनच सुरू झाले. अफगाणिस्तान महाभारत काळाशी संबंधित आहे तर जाणून घेऊया अशीच रंजक माहिती ...

​महाभारताच्या षडयंत्राची सुरुवात  अफगाण येथून झाली

कांधारचे नाव पूर्वी गांधार होते. नंतर ते गांधारातून कांधार कसे झाले याबाबत वेद व्यासजींच्या महाभारतात बरेच काही सांगितले गेले आहे. सुमारे ५५०० वर्षांपूर्वी राजा सुबल गांधारवर राज्य करायचे.याएलतास आश्चर्य वाटेल  कौरव जसे 100 जण भाऊ व एकच बहीण होते तसेच गांधार राजा 100 मुले व एक मुलगी होती .व ते कौरवजसे पांडवांकडून मारले गेले तसेच हे 99 जण धृतराष्ट्रकरवी   मारले गेले होते तेही महाभारत युद्ध व कौरव जन्म आधीच. त्यांच्या मुलीचे नाव गांधारी होते.
भीष्माच्या मुळे अंध धृतराष्ट्राचा  गंधारीसार ख्या सुंदर युवतीशी विवाह झाला .व तो करताना भीमाने केलेल्या 10 चुकांपैकी एक चूक केली व महाभारताची बीजे रुजली गेली

भीष्माने हा गुन्हा केला.  गांधारी आंधळी नाही हे जाणून भीष्माने जबरदस्तीने गांधारीचे लग्न धृतराष्ट्राशी केले.  आपल्या बहिणीवर खूप प्रेम करणारी शकुनी आपल्या बहिणीवर झालेल्या या अन्यायाचा बदला घेण्यासाठी आयुष्यभर युक्त्या खेळत राहिली आणि त्यामुळे महाभारत युद्ध झाले.

अशी आख्यायिका आहे की त्यावेळी गांधार राजकन्येच्या स्वरूपाची चर्चा संपूर्ण आर्यवर्तात होती.  अशा परिस्थितीत आजोबा भीष्माने धृतराष्ट्राचा विवाह गांधारच्या राजकन्येशी करण्याचा विचार केला.  प्रथम त्यांना वाटले की गांधारीचे अपहरण करून आणले पाहिजे, परंतु अंबा आणि अंबालिका यांनी तसे करण्यास नकार दिला, म्हणून पितामह भीष्माने धृतराष्ट्राचा संबंध गांधारच्या दरबारात नेला, परंतु त्याला माहित होते की त्याचा प्रस्ताव नाकारला जाईल.तेव्हा पितामह भीष्म संतप्त स्वरात म्हणाले की मी तुमच्या या छोट्या राज्यावर हल्ला करून त्याचा नाश करीन.अखेरीस राजा सुबलला भीष्मापुढे नतमस्तक व्हावे लागले आणि मोठ्या दुःखाने त्याला आपल्या सुंदर मुलीचा विवाह अंध राजकुमार धृतराष्ट्राशी करावा लागला.ययाची सल  व त्यानुसार सुडाचे बीज 100 व्या सगळ्यात लहान सुबल पुत्राच्या माबत घर करून बसले.
हेही नसे थोडके ,म्हणून लग्नानंतर धृतराष्ट्र हि एक मोठी चूक करता झाला .व शकुनीच्या मनात कौरवांच्या विनाशाच्या विचाराची प्रगल्भता  वाढली.
काय झाले नेमके पाहुयात पुढील भागात
इदं न मम।
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महाभारत के श्राप से त्रस्त कब्रिस्तान: अफगानिस्तान: महाभारत युद्ध कि  जड़ और अफगानिस्तान की अस्थिरता  की जड़*.:* $#¡v@"√∆¥ डॉ $@π√∆¥
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              । शिवसंकल्पपमस्तु।
मैंने हमेशा महसूस किया है कि हिंदू धर्म और भारत के सभी रीति-रिवाज, संस्कृति, त्योहार, युद्ध, तिथिया-महीने, धर्म, प्रथाएं पूरी तरह से वैज्ञानिक हैं। यह हमारा दुर्भाग्य है कि आज भी हम इसके आधिकारिक रिकॉर्ड और शिक्षा से वंचित हैं और जानबूझकर रखे जा रहे हैं ( राखे गये है ), हम एक सचेत साजिश के शिकार हैं।
हमारी संस्कृति कहती है कि श्राप, श्राप या किसीकी हाय नहीं लेना चाहिए क्योंकि जैसा करना वैसा ही भुगतान होता है ,जो बोया सो पाया  इस विधांसे सब वापस भूगताना पडता है।संकट का परिणाम भुगतना चाहिए। इसे हमारी आध्यात्मिक भाषा में *सूक्ष्म कर्म सिद्धांत* कहा जाता है। अब पूरी दुनिया धीरे-धीरे हाइ सही  इसे स्वीकार कर लिया और इसे 1971 तितली इफेक्ट/ बटर फ्लाई इफेक्ट इस प्यारे  नाम से जाना जाता है। बटरफ्लाई इफेक्ट भारत के विभाजन, नेहरू गांधी वंश और इसके अंत के पीछे का सिद्धांत है। इस वजह से, अफगानिस्तान पिछले कुछ समय से अस्थिरता से पीड़ित है। 5500 सालोन्से साम्राज्यों का कब्रिस्तान बन गया है। *अफगानिस्तान साम्राज्यों का कब्रिस्तान है, अफगानिस्तान साम्राज्यों की कब्रगाह है।
अफगानिस्तान की अस्थिरता महाभारत में निहित है और महाभारत में नरसंहार अफगानिस्तान में निहित है आइए देखें कि कैसे।
  अफगानिस्तान के साथ भारत के संबंध एक दशक या सौ साल पुराने नहीं बल्कि हजारों साल पुराने हैं।  जी हां, भारत के साथ अफगानिस्तान का 5,500 साल पुराना रिश्ता है। उस साम्य भारत कि सीमाये गांधार तर्क थी तथा गांधार मी हिंदू साम्राज्य था। इसके अलावा, महाभारत की साजिश, जिसे इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है, अफगानिस्तान में निहित है और अफगानिस्तान में अस्थिरता का अभिशाप मूल महाभारत में निहित है।
  अगर अफगानिस्तान का संबंध महाभारत काल से है, तो आइए जानते हैं ऐसी ही रोचक जानकारी...

आज, तालिबान शासन ने अफगानिस्तान पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया है।  सभी सरकारी संस्थान अब तालिबान आतंकवादियों के हाथ में हैं, लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह से नष्ट हो गई है।  देश, जिसमें अब मुस्लिम आबादी है, कभी हिंदू संस्कृति और रीति-रिवाजों में विश्वास रखता था।  इतिहास के पन्ने खंगाल कर
आइए जानें अफगानिस्तान-भारत संबंधों के बारे में।  अफगानिस्तान के साथ भारत का रिश्ता एक दशक या सौ साल पुराना नहीं बल्कि हजारों साल पुराना है।  जी हां, भारत के साथ अफगानिस्तान का 5,500 साल पुराना रिश्ता है।  इतना ही नहीं इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध माने जाने वाले महाभारत के षडयंत्र की शुरुआत भी यहीं से हुई थी।  अगर अफगानिस्तान का संबंध महाभारत काल से है, तो आइए जानते हैं ऐसी ही रोचक जानकारी...

महाभारत की साजिश अफगानिस्तान में शुरू हुई थी

कंधार को पहले गांधार के नाम से जाना जाता था।  वेद व्यासजी के महाभारत में बहुत कुछ कहा गया है कि कैसे यह बाद में गांधार से कंधार बन गया।  लगभग ५५०० साल पहले, हिन्दू राजा सुबल ने गांधार पर शासन किया था। आज बहुतोंको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कौरव जैसे १०० भाई और एक बहन, वैसे हि सुबल राजको  १०० बेटे और एक बेटी थी। याउर वॊह भी 99/100 मर्वये गये थे धृतराष्ट्र के हाथों और बादमे 100/1000 कौरव म्हबारात मी मारे गये थे ।खाणे का मतलब है सुबल राजा भी पहले से ही पैदा हुए 100 पुत्र एवं एक पुत्री थी।  उनकी पुत्री का नाम गांधारी था।
भीष्म के कारण अंध धृतराष्ट्र का विवाह गांधारी जैसी सुंदरी कन्या से हुआ।

भीष्म ने यह अपराध किया था।  यह जानते हुए कि गांधारी अंधी नहीं थी, भीष्म ने गांधारी का विवाह अंध धृतराष्ट्र से जबरन किया। अपनी बहन से बहुत प्यार करने वाले शकुनि अपनी बहन के साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए  बीज बॉय गये और बादमे जीवन भर छल कपट करते रहे और इसी के कारण महाभारत का युद्ध हुआ।

  किंवदंती है कि उस समय पूरे आर्यावर्त में गांधार राजकुमारी के रूप की चर्चा हुई थी।  ऐसे में दादा भीष्म ने धृतराष्ट्र का विवाह गांधार की राजकुमारी से करने का फैसला किया।  पहले तो उन्होने सोचा कि गांधारी का अपहरण कर लिया जाना चाहिए, लेकिन अम्बा और अंबालिका ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, इसलिए पितामह भीष्म धृतराष्ट्र के रिश्ते को गांधार के दरबार में ले गए, लेकिन उन्हें पता था कि उनका प्रस्ताव खारिज कर दिया जाएगा।  तब दादा भीष्म ने क्रोधित स्वर में कहा कि मैं तुम्हारे इस छोटे से राज्य पर आक्रमण करके नष्ट कर दूंगा।  आखिरकार राजा सुबल को भीष्म के सामने झुकना पड़ा और बड़े दुख के साथ उन्हें अपनी सुंदर बेटी का विवाह अंधे राजकुमार धृतराष्ट्र से करना पड़ा।यहं अपमान शकुनी के दिल मी घर कर गया।
धृतराष्ट्र ने भी शादी के बाद एक बड़ी गलती कर दी।
देखते हैं क्या हुआ अगले भाग में
इदं न मम।
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