Posts

Showing posts from March, 2021

पीर योगी दादा चे नंदनवन।गिरनारी तपोवन।3। माळरानात चैतन्य वन।।।"$#¡v@π√∆

अगस्तै नमः।कृन्वंतो विश्वम् आर्यम्।।                            भाग 3                              पीर योगी दादा चे नंदनवन। गिरनारी तपोवन।ब।  माळरानात चैतन्य वन।।। "$#¡v@π√∆¥":dr  $@π√@¥ #©πk@£$€ drsanjayhonkalse@gmail.com https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=4415423431806633&id=100000170606055 अगस्तै नमः।कृन्वंतो विश्वम् आर्यम्।।                            भाग 3                              पीर योगी दादा चे नंदनवन। गिरनारी तपोवन।।  माळरानात चैतन्य वन।।। "$#¡v@π√∆¥":dr  $@π√@¥ #©πk@£$€ drsanjayhonkalse@gmail.com

अवघड नाथ दादा बापट गिरनारी:चैतन्य मूर्ती "तपोवनकार":एक विभूती दिलदार ।दैवीअनुभूतीचा मिरासदार।।

अगस्तै नमः।कृन्वंतो विश्वम् आर्यम्। अवघड नाथ दादा बापट गिरनारी: चैतन्य मूर्ती "तपोवनकार": एक विभूती दिलदार । दैवीअनुभूतीचा मिरासदार।। भाग 1© "$#¡v@π√∆¥" dr. $@π√∆¥ #●πk@£$€ drsanjayhonkalse@gmail.com एक लायक मुलाची लायक आई मंदिराजवळ भीक मागताना पाहून एका संताने तिला विचारले की तुझा मुलगा परदेशस्थ श्रीमंतआहे तो तुम्हाला काही पाठवत नाही का ?? * खरं तर तिचा मुलगा दर महिन्यास तिला 50 हजाराचा बँक draft पाठवीत असे पण अज्ञानामुळे तिने असे 60 draft रंगीत चित्र समजून बाजूस ठेवले होते.अज्ञानवश  तिला तिच्याकडे किती मौल्यवान  मत्ता आहे हे माहित नव्हते. संताने तिला त्याचे मूल्य समजावून सांगितले. * * आपल्या हिंदूंची परिस्थितीही  त्या वृद्ध आईसारखीच "तूझं आहे तुज पाशी परी तू जागा चुकलाशी "अशी  कस्तुरीमृगासम आहे. आपल्याकडे शास्त्रोक्त,सार्वत्रिक,सर्व समावेशक धर्म व धर्मग्रंथ आहेत पण आपण फक्त ती घरात ठेऊन आहोत त्या आजी सारखी ज्याचा वास्तविक फायदा चिंतन व अज्ञाना अभावी घेत नाही. दुर्दैवाने Nehruvian philosophy,पहिले तीन अयोग्य शिक्षणमंत्री,आंधांग्ळेले पाश्चातिकरण(Blinded We...

हिंदी:अगस्त्यै नमः।कृन्वंतो विश्वम् आर्यम्।।औघडनाथ दादा बापट गिरनारी:"तपोवनकार चैतन्य मूर्त कीर्ती।एक महान विभूती ।।

अगस्त्यै नमः।कृन्वंतो विश्वम् आर्यम्।। औघडनाथ दादा बापट गिरनारी: "तपोवनकार चैतन्य मूर्त कीर्ती। एक महान विभूती ।।   ईश्वरीय अनुभूती कि संवाहक मूर्ती।।। भाग 1 "$#¡V@π√∆¥" dr. $@π√@¥ #●πk@£$€ drsanjayhonkalse@gmail.com मंदिर के पास भीख मांगते हुए एक योग्य बच्चे की योग्य माँ को देखकर एक संत ने उससे पूछा, "क्या तुम्हारा विदेशस्थित पुत्र  समृद्ध   तुम्हें कुछ नहीं भेजता?" * वास्तव में, उसका बेटा उसे 50,000 रुपये प्रति माह का बैंक ड्राफ्ट भेजता था, लेकिन अज्ञानता के कारण उसने ऐसे 60 ड्राफ्ट रंगीन कागझ समझकर अलग रख दिए थें। संत ने उसे इसका मूल्य समझाया।  हमारे हिंदुओं की स्थिति एक बूढ़ी माँ की तरह है जो कस्तूरी मृग की तरह कस्तुरी पास होते हुए भी इतरत्र सुगन्ध धुंढता रहता है। हमारे पास वैज्ञानिक, सार्वभौमिक, सर्व-समावेशी धर्म और धर्मग्रंथ हैं, लेकिन हम उन्हें केवल उस दादी की तरह घर में रख रहे हैं, जिसका वास्तविक लाभ चिंतन और अज्ञान की कमी कि वजहसे नहीं लिया जाता है। दुर्भाग्य से नेहरूवादी दर्शन, शिक्षा के पहले तीन अयोग्य मंत्रियों,अंधांग्लिय पाश्चाती करन -ब्लाइंडेड पश्...

अवघडनाथ पीर योगी दादा दयानाथ बापट:

अवघडनाथ पीर योगी दादा दयानाथ बापट: हिंदी  भाग 2  संन्यस्त संसारी दादा अवघडनाथ $#¡v@π√∆¥ dr $@π√∆¥ #●k@£$€© drsanjayhonkalse@gmail. com भाग 1 जे लिये लिंक https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=4405039169511726&id=100000170606055   "$#¡v@π√∆¥":dr$@π√@¥ #©πk@£$€ drsanjayhonkalse@gmail.com कुमारस्वामी की यात्रा के बाद, दादा ने सांसारिक मामलों में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की, बेलगाम के एक कॉलेज में गए और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर की डिग्री प्राप्त की। अपने जीवन के लिए संघर्ष करते हुए, उन्होंने मिरज के MIDC क्षेत्र में अपना कारखाना शुरू किया।  जीवन के तरीके को स्वीकार करते हुए, उन्होंने विवाह कर्तव्य का पालन किया। उनकी अर्धांगिनी स्वातीजी भी एक पॉलिटेक्निक ग्रेजुएट हैं। वे दादा की फैक्ट्री में सह-मालिक हैं और फैक्ट्री के काम में भाग लेती हैं। इस  जीवन यात्रा में वो दादा के साथ  अध्यात्म धर्म भी निभा रहि है। यह सौभाग्यर्पूर्ण है कि उनकी अर्धांगिनी वास्तव में एक  "अर्ध अंगिनी " है और इसमें दादाजी को बहुत लाभान्वित किया है। ...